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भारतेंदु हरिश्चंद्र की 174वी जयंती पर 15 साहित्यकारो को किया सम्मानित

निज भाषा उन्नति अहै...का मंत्र हो रहा साकार

संजय कुमार

कोटा, 10 सितम्बर। भारतेंदु हरिश्चंद्र की 174वीं जयंती पर भारतेन्दु समिति लाडपुरा द्वारा श्री माहेश्वरी भवन में विशेष समारोह का आयोजन किया गया। अध्यक्ष हरिकृष्णबिरला ने बताया कि कार्यक्रम में भारतेंदु के मूल्यों और उनके अमूल्य योगदान को याद किया गया। उनका प्रमुख नारा “निज भाषा उन्नति अहै” हिंदी और भारतीय भाषाओं के संरक्षण एवं प्रचार में प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन कवि एवं वरिष्ठ साहित्यकार रामेश्वर शर्मा रामू भैया ने किया। स्वागत भाषण समिति के अध्यक्ष हरिकृष्ण बिरला ने पढ़ा।सभी आभार महामंत्री सचिव सुनील जायसवाल व अर्थ मंत्री राजेन्द्र शारदा ने अंत में प्रकट किया। इस अवसर पर समिति की त्रैमासिक पुस्तक चिदम्बरा का लोकापर्ण किया गया।

इन्हे किया सम्मानित
मुख्य अतिथि मदन दिलावर शिक्षा मंत्री, राजस्थान सरकार, अध्यक्षता कर रहे उपसभापति (पश्चिमांचल) अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा राजेशकृष्ण बिरला, अध्यक्ष हरिकृष्ण बिरला, विशिष्ट अतिथि महापौर राजीव अग्रवाल, मेला समिति अध्यक्ष विवेक राजवंशी, भाजपा नेता पंकज मेहता, भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश जैन, समिति के निजामुद्दीन बबलू व साहित्याकार रामेश्वर शर्मा (रामू भैया) ने 15 साहित्यकारों व कवियों को माला शॉल व प्रमाणपत्र तथा स्मृति पत्र भेंट कर कर सम्मानित किया। महामंत्री सुनिल जायसवाल व अर्थमंत्री राजेन्द्र शारदा ने बताय कि फूलचंद शर्मा को प्रतिष्ठित हनुमान प्रसाद सक्सेना हिंदी सम्मान व डॉ. राजेंद्र माहेश्वरी को स्वर सुधाश्री से सम्मानित किया गया और 13 साहित्यकारों को साहित्यश्री 2024 से सम्मानित किया गया। डॉ. उषा खण्डेलवाल, दमोह, डॉ. गायत्री सिंह, कानपुर, डॉ. वर्षा सिंह, महाराष्ट्र, डॉ. संध्या सिंह सूफी, झारखण्ड, रचना सरन, कोलकाता, श्रीमती पल्लवी दरक न्याती, कोटा, पद्मावती पदम, आगरा, मंजू किशोर रश्मि, कोटा, डॉ. नीलप्रभा नाहर, कोटा, डॉ. आदित्य गुप्ता, कोटा , महेश पंचोली, कापरेन, देवकी नन्दन दर्पण, रोटेदा हेमराज सिंह हेम, कोटा को साहित्य श्री से सम्मानित किया गया।

हिंदी में आधुनिकता प्रथम रचनाकार
मुख्य अतिथि मदन दिलावर ने साहित्यकारों को सहेज के रखने,प्रोत्साहित करने, नवाचारों से जोड़कर साहित्य को आगे बढ़ाने की बात कही।भारतेंदु की प्रशंसा करते हुए कहा कि हिंदी शिक्षा को प्रोत्साहित करना: उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य के शिक्षण को बढ़ावा दिया, ताकि युवाओं को हिंदी की गहन समझ और प्रेम मिले।

कार्यक्रम समन्वयक व रेडक्रॉस के स्टेट प्रसिडेंट राजेश कृष्ण बिरला कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्रजी हिंदी साहित्य के पितामह व हिंदी में आधुनिकता के पहले रचनाकार रहे है। श्री भारतेंदु जी ने रीतिकाल की विकृत सामन्ती संस्कृति की पोषक वृत्तियों को छोड़कर स्वस्थ परंपरा की भूमि अपनाई और नवीनता के बीज बोये। हरिकृष्ण बिरला ने कहा कि
हिंदी साहित्य में आधुनिक काल का प्रारंभ भारतेंदु हरीशचंद्र से माना जाता है।उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में अपनी प्रतिभा का उपयोग किया।

पंकज मेहता ने अपने उद्बोधन में कहा कि समिति में राजेश कृष्णा बिरला द्वारा साहित्यकार सम्मान समारोह प्रारंभ हुआ और उसे हरिकृष्ण ने नई ऊंचाइयों पर पहुंचा महापौर राजीव अग्रवाल ने अपने पिता की पंक्तियों से अपना उद्बोधन प्रारंभ किया उन्होंने कहानी कविताएं भी सुनाई। सुनील जायसवाल ने कहा कि भारतेंदु बहुमुखी प्रतिभा के धनी भारतेन्दुजी का हिंदी पत्रकारिता, नाटक और काव्य के क्षेत्र में बहूमूल्य योगदान रहा है।नई क्रांति भाषा के आधार पर भारतेंदु जी प्रयासों का ही असर है। उन्होंने हिंदी कविता, नाटक, उपन्यास और अन्य साहित्यिक विधाओं को नई दिशा प्रदान की। उनकी कृतियों ने हिंदी साहित्य को गहराई और संपन्नता प्रदान की।

यह रहे उपस्थित
झालावाड़ रोड़ स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित साहित्य सम्मान समारोह में उपसभापति (पश्चिमांचल) अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा राजेश कृष्ण बिरला, महामंत्री सुनील जायसवाल,अर्थमंत्री राजेन्द्र शारदा, साहित्य मंत्री प्रदीप सक्सेना, प्रचार मंत्री गोपाल सोमानी,प्रबंधकीय मंत्री गोपाल शारदा,शिक्षा एवं पुस्तकालय मंत्री उमेश कुमार गांधी,पंकज जयसवाल, महेश चंद अजमेरा, सुरेश चंद काबरा, पंकज जायसवाल,आरएस राजेश डागा, डीवाईएसपी अंकित जैन,प्रेम भाटिया, बिट्ठल दास मुंदड़ा, राजीव मेवाडा, महेन्द्र खण्डेलवाल, महेन्द्र कुमार, निजामुद्दीन बबलू, अजय बाकलीवाल, प्रमोद कुमार भंडारी शहर की कई साहित्यकार व कविता प्रेमी उपस्थित रहे।

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